Sunday, November 12, 2017

देश की राजधानी दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति विचारणीय

इधर पिछले कई दिनों से दिल्ली का वायुमंडल बुरी तरह से प्रभावित हुआ है और प्रदूषण की मात्रा गंभीर रूप से बढ़ गई । हाला इतनी घातक हो गई है की लोगों का सांस लेना दूभर हो गया । लोगों की जान पर बन आई है । स्कूल और कॉलेज बंद करने पड़े हैं और दफ्तर जाने वाले दिल्ली वासियों की जान खतरे में है । हृदय के मरीज और सांस की तकलीफ से पीड़ित लोगों की दशा दयनीय है । लोगों को बंद दरवाजों मे रहने की चिकत्सीय सलाह दी जा रही है । बीबीसी और सी एन एन जैसे टीवी चेनलों में इस खबर को बार बार हाइलाईट किया जा रहा है । यह घटना, अंतर राष्ट्रीय धरातल पर विदेशियों का ध्यान आकर्षित कर रही है । यह देश के सम्मान के लिए निषेधात्मक है और अपमानजनक तथा शर्मनाक भी है । यह प्रदूषण की समस्या दिल्ली मे कई बरसों से बनी हुई है और हर बरस यह बढ़ती ही जा रही है, प्रदूषण सूचकांक हर वर्ष बढ़ता जा रहा है, यह चिंता का विषय है । इस समस्या से जूझने और इसे हल करने के सारे भारतीय उपाय विफल हो चुके हैं और आज हमारे पास इस समस्या का समाधान नहीं है । दिल्ली के वायुमंडल पर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में व्याप्त प्रदूषण का सीधा असर पड़ता है जिसे नियंत्रित करने का दायित्व इन तीनों राज्यों को भी है । ये सभी राज्य आपस में तालमेल के साथ अपने अपने प्रदूषण के स्रोतों को जब तक नियंत्रित नहीं करेंगे तब तक यह समस्या जारी रहेगी । दुर्भाग्य है कि हमारे देश में जनता के जान की कीमत कुछ भी नहीं है । सरकारों के लिए आम आदमी की जान की कोई कीमत नहीं होती । हर राज्य पड़ोसी राज्य सरकारों को दोषी मान रहा है और एक दूसरे पर दोष मध रहे हैं किन्तु उपाय कोई नहीं कर रहा है । सरकारें चाहे किसी भी दल की हों, ऐसी  आपातस्थिति में सबको एकजुट होकर समस्या का समाधान तलाशने की अनिवार्यता है । जरूरत पड़े तो हमें विदेशी तकनीकी सहायता भी लेने से पीछे नहीं हटना चाहिए ।

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